समर्थक

Showing posts with label बालगीत. Show all posts
Showing posts with label बालगीत. Show all posts

Friday, 3 August 2012

डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" का बालगीत

"बादल तो बादल होते हैं"
श्वेत-श्याम से नभ में उगते,
निर्मल जल का सिन्धु समेटे,
लेकिन धुआँ-धुआँ होते हैं ।
बादल तो बादल होते हैं ।

बल के साथ गरजते रहते,
दल के साथ लरजते रहते,
जग में यहाँ-वहाँ होते हैं ।
बादल तो बादल होते हैं ।

चन्द्र,सूर्य का तेज घटाते,
इनसे तारागण ढक जाते,
बादल जहाँ-जहाँ होते हैं ।
बादल तो बादल होते हैं ।