| "बादल तो बादल होते हैं" श्वेत-श्याम से नभ में उगते, निर्मल जल का सिन्धु समेटे, लेकिन धुआँ-धुआँ होते हैं । बादल तो बादल होते हैं । बल के साथ गरजते रहते, दल के साथ लरजते रहते, जग में यहाँ-वहाँ होते हैं । बादल तो बादल होते हैं । चन्द्र,सूर्य का तेज घटाते, इनसे तारागण ढक जाते, बादल जहाँ-जहाँ होते हैं । बादल तो बादल होते हैं । |